
बिहार में सिविल सर्जन के साथ बदसलूकी और धक्का मुक्की का मुद्दा तूल पकड़ने लगा है । मुजफ्फरपुर जिले के सरकारी डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं । नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल सहित सभी 16 पीएचसी और शहरी क्षेत्र के पीएचसी के आउटडोर सेवा को बाधित कर दिया है.
चिकित्सकों ने किया कार्य बहिष्कार
सिविल सर्जन डॉ एसपी सिंह के साथ हुई बदसलूकी और कॉलर पकड़कर घसीटे जाने से चिकित्सक आहत हैं और गुस्से में हैं. यह पहला मौका है जब मुजफ्फरपुर में किसी सिविल सर्जन के साथ इस तरह की घटना हुई है. गुस्साए चिकित्सकों ने सदर अस्पताल और सभी पीएचसी में मरीजों का इलाज नहीं किया इससे आउटडोर सेवा पूरी तरह बाधित रही. हलांकि इमरजेंसी के मरीजों का चिकित्सकों ने इलाज किया.
भासा ने दी बहिष्कार करने की चेतावनी
बिहार हेल्थ सर्विस एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों ने सदर अस्पताल परिसर में बैठक की. इसमें सिविल सर्जन के साथ ही आइएमए से जुड़े चिकित्सकों ने भी भाग लिया. बैठक में शनिवार तक सभी सरकारी अस्पताल के आउटडोर सेवा को बहिष्कार करने का फैसला लिया गया. इसके साथ ही डॉक्टरों ने अस्पतालों में सुरक्षा की गारंटी के साथ मुख्य आरोपी अखिलेश यादव को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने की मांग की है. गिरफ्तारी नहीं होने पर सोमवार से अस्पतालों की आपात सेवा के बहिष्कार का भी निर्णय लिया.
औराई पीएचसी के सभी चिकित्सक और कर्मियों ने बंद किए कार्य
मारपीट के बाद दहशत के साये में रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सक मुजफ्फरपुर मुख्यालय पहुंच गए हैं. सुरक्षा की गारंटी होने तक स्वास्थ्य केन्द्र में नहीं जाने का चिकित्सकों और कर्मियों ने फैसला लिया है. साथ ही आरोपियों के गिरफ्तारी की मांग की है.
डीएम ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई का दिया है आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के डीएम आलोक रंजन घोष ने नामजद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है. हलांकि स्वास्थ्य कर्मियों या सिविल सर्जन की ओर से अब तक औराई थाने में लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. लेकिन, भासा की बैठक में थाना में पीड़ितों के द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए शिकायत करने का फैसला लिया गया है.
मुख्य आरोपी है पूर्व विधायक का बेटा
बता दें कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट करने और सिविल सर्जन का कॉलर पकड़कर घसीटने वाले मुख्य आरोपी की पहचान अखिलेश यादव के रूप में की गई है. ये पूर्व विधायक गणेश यादव का बेटा है. अखिलेश यादव खुद भी औराई विधान सभा क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय है. बता दें कि बुधवार को पीएचसी में एक्सपायरी ओआरएस मिलने के बाद दो दिनों से अखिलेश यादव के नेतृत्व में औराई पीएचसी में लोगों का धरना प्रदर्शन चल रहा था.
सिविल सर्जन को- कॉलर पकड़कर दौड़ाया था
गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन का कॉलर पकड़कर उत्तेजित भीड़ ने बुधवार को घसीटा था. सिविल सर्जन के साथ बदसलूकी की हद पार करते हुए लोगों ने कॉलर पकड़कर काफी दूर तक दौड़ाया. सिविल सर्जन के साथ ही औराई पीएचसी के चार कर्मियों के साथ भी मारपीट की गई.
सिविल सर्जन ने जांच में रुकावट करने की बात बताई
सिविल सर्जन डॉ एस पी सिंह ने कहा कि एक्सपायरी दवा की जांच करने औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गए थे. साथ में एसीएमओ भी थे, लेकिन इसी बीच उत्तेजित लोगों ने जांच करने ही नहीं दिया. दरअसल ओआरएस के एक्सपायर वितरण के बाद आन्दोलन कर रहे लोग दवा भंडार की जांच की मांग कर रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने एक्सपायरी दवा जांच का दिया है आदेश
बता दें कि पटना से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने सिविल सर्जन को मामले की जांच के लिए कहा था. दरअसल औराई में एक्सपायर दवा से संबंधित हाल के दिनों में दो मामले सामने आए हैं, लेकिन जांच नहीं होने से मामला फंसा हुआ है. दूसरी ओर विरोध-प्रदर्शन में शामिल लोग 3 दिनों से दवा भंडारण की जांच के साथ दोषियों पर कारवाई की मांग कर रहे हैं.
दवा भंडार की जांच की लोग कर रहे मांग
गौरतलब है कि पीएचसी में एक्सपायरी ओआरएस मिलने के बाद मंगलवार से पीएचसी का काम-काज लोगों ने बंद कर रखा है. ये भंडार की दवा की जांच की मांग कर रहे हैं. ओआरएस एक्सपायर वितरण के बाद लक्ष्मण प्रसाद यादव ने औराई के थाना प्रभारी से इस सबंध में लिखित शिकायत की है. जिसमें उसके बेटे जय प्रकाश यादव को ओआरएस देने पर उल्टी होने और तबीयत खराब होने की शिकायत की गई है.