भारी मात्रा में शराब जब्त, नष्ट करने पुलिस को 2 दिन लगे.. जानिए पूरा मामला

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बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब की तस्करी किस कदर हो रही है. इसका अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि पकड़ी गई शराब के विशाल खेप को नष्ट करने के लिए पुलिस को दो दिन लग गए. तब जाकर शराब की बोतलों को नष्ट कर पाए

क्या है पूरा मामला
राजधानी पटना में उत्पाद विभाग की ओर से बाईपासा थाना समेत अन्य इलाकों से बरामद की गई थी. उन शराबों को नष्ट करने में पुलिस को दो दिन लग गए. पटना सिटी के अगमकुआं थाना क्षेत्र में टांसपोर्ट नगर चौकी के पास बाईपास थाना समेत विभिन्न स्थानों से जब्त की गई 61178.760 लीटर अंग्रेजी शराब की बोतल को डम्फर और रोलर के द्वारा विनष्टीकरण (Destroy)की प्रक्रिया की गई.

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मजिस्ट्रेट भी रहे मौजूद
जब शराब की बोतलों को नष्ट किया जा रहा था तब मजिस्ट्रेट और उत्पाद विभाग के SHO मौजूद थे. उत्पाद विभाग के थानाध्यक्ष की मानें तो आलाधिकारी के निर्देश पर जब्त किये गए शराब को नष्ट किया गया है. अगले आदेश मिलने पर और भी स्थानों पर जब्ती कई गई है. अभी कई लीटर शराबों की खेप का विनष्टीकरण बाकी है. इसके पहले कुछ ही दिनों पहले पटना क्षेत्र के एक थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर शराब की खेप पकड़ी गई थी. दिलचस्प बात यह है कि धंधेबाज वहीं से अपनी काली-करतूतों को अंजाम भी देते थे और पुलिस को नाक के नीचे हो रही इस तस्करी का अंदेशा भी नहीं हो पाया.

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भारी मात्रा में शराब हुआ था बरामद
गौरतलब है कि पटना सिटी के बाईपास थाना के महज 500 सौ मीटर दूरी पर स्थित गोदाम से मध्य निषेद विभाग टीम ने गोदाम में 10 चक्का वाले 6 ट्रक और 4 चक्का वाले 3 पिकअप वैन में छापेमारी की. जहां चावल की भूसी में छिपाकर रखे गए 5 हजार से ऊपर अंग्रेजी शराब के कार्टून को बरामद किया है. इसकी कीमत 2 करोड़ से ऊपर थी.

8 लोग गिरफ्तार हुए थे
इस मामले में चालक और मजदूर समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. बाद में गोदाम मालिक राजू उर्फ अविनाश कुमार को गिरफ्तार किया गया था. वही बाईपास थाना के महज 500 मीटर की दूरी पर चल रहा शराब का कारोबार में बाईपास थाना की पुलिस संदेह के घेरे में थी जिसमें पुलिस के उच्च अधिकारियों ने वाईपास थानाध्यक्ष मुकेश पासवान को निलंबित कर दिया था. हालांकि, मीडिया में खबरें आने के बाद जांच हुई और वहां के थानाध्यक्ष का ट्रांसफर (Transfer) करा दिया गया. सवाल यह है कि कितनी दफा किसी भी अधिकारी या थानाध्यक्ष का ट्रांसफर और सस्पेंशन होता रहेगा. क्योंकि बिहार में तो हर दिन शराब की बड़ी-छोटी खेपें बरामद होते रहती हैं.

सवाल यह भी है कि बिहार में शराबबंदी का ढोल पीटने वाली सरकार कब तक इन खेपों को बरामद कर लेने की वाहवाही लूटते रहेगी.

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