
लोकसभा चुनाव की मतगणना 23 मई को है। लेकिन इस बार सभी नतीजे आने में एक से दो दिन की देरी हो सकती है। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट का वो आदेश बताया जा रहा है । जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव में ईवीएम और वीवीपैट के मिलान को पांच गुना बढ़ा दिया है.
अब 5 बूथों की पर्ची का होगा मिलान
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं में विश्वास और चुनावी प्रक्रिया में विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए अहम आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को कहा है कि लोकसभा चुनाव में हर विधानसभा क्षेत्र में पांच बूथों की वीवीपैट पर्चियों की औचक जांच की जाए। जिसे चुनाव आयोग ने मान लिया है । अब तक सिर्फ एक ही ईवीएम का वीवीपैट पर्चियों से मिलान होता है।
क्यों होगी देरी समझिए
अभी चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक मतदान केंद्र में और लोकसभा चुनाव में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र में इस प्रकिया का पालन करता है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब हर विधानसभा क्षेत्र में एक के बजाय पांच बूथों पर ईवीएम-वीवीपैट का औचक मिलान करना होगा. यानि अभी तक चुनाव आयोग 4125 ईवीएम और वीवीपैट के मिलान कराता है. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये बढ़कर 20,625 ईवीएम और वीवीपैट का मिलान करना होगा. जिससे नतीजे आने में देरी हो सकती है।
विपक्ष की मांग खारिज
दरअसल, 21 राजनीतिक दलों के नेताओं ने लगभग 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों से मिलान की मांग की थी. विपक्षी नेताओं का सुप्रीम कोर्ट में कहना था कि उन्हें 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों की गिनती से चुनाव नतीजे में देर होने पर आपत्ति नहीं है. क्योंकि जब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पचास फीसदी पर्चियों के मिलान को लेकर जवाब पूछा था तो चुनाव आयोग ने कहा था कि इससे चुनाव नतीजे में एक हफ्ते की देरी हो सकती है । जिसके बाद अदालत ने विपक्षी की 50 फीसदी पर्चियों के मिलान की मांग को खारिज कर दिया
क्या होता है वीवीपैट मशीन
VVPAT यानि वोटर वेरीफाइड ऑडिट ट्रेल मशीन, जो ईवीएम से जुड़ी होती है. जब मतदाता ईवीएम पर बटन दबाता है तब वीवीपैट मशीन से एक पर्ची निकलती है जिस पर उस पार्टी का चुनाव निशान और उम्मीदवार का नाम होता है जिसे मतदाता ने वोट दिया होता है. मतदाता को सात सेकेंड तक दिखने के बाद ये वीवीपैट मशीन में एक बक्से में गिर जाती है.