Home खास खबरें पटना साहिब में शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद में जंग.. सियासी समीकरण और जातीय गणित समझिए

पटना साहिब में शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद में जंग.. सियासी समीकरण और जातीय गणित समझिए

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लोकसभा चुनाव में पटना साहिब की सीट हाईप्रोफाइल सीट बन चुकी है। इस सीट पर बिहार ही नहीं देशभर की नजर है। पटना साहिब सीट से मौजूदा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा इस बार कांग्रेस के टिकट पर ताल ठोंकेंगे तो वहीं बीजेपी ने बिहारी बाबू की काट के लिए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को मैदान में उतारा है।जिससे साफ जाहिर है कि पटना की सियासी रणभूमि में रविशंकर प्रसाद को अपने ही पुराने साथी शत्रुघ्न सिन्हा से कड़ा मुकाबला करना होगा.

कायस्थ वोटरों का गढ़ है पटना साहिब
पटना साहिब को मोटे तौर पर कायस्थ राजनीति की प्रयोगशाला भी माना जाता है.कहा जाता है कि जो यहां का सिकंदर होगा, वही कायस्थ का नेता होगा. पटना साहिब सीट पर लगभग 19 लाख वोटर हैं। जिसमें चार लाख से अधिक कायस्थ मतदाता हैं. पटना साहिब की चार विधानसभा सीट दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार और पटना पूर्वी में कायस्थों की बड़ी आबादी है. बांकीपुर से बीजेपी विधायक नीतिन नवीन और कुम्हरार विधायक अरूण कुमार सिन्हा भी कायस्थ जाति के हैं।

पटना साहिब सीट पर जातीय समीकरण
पटना साहिब लोकसभा सीट पर कायस्थों के बाद यादव और राजपूत वोटरों का बोलबाला है. पिछले दो लोकसभा चुनावों से पटना साहिब सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार नंबर दो रहे हैं. ऐसे में महागठबंधन के तहत ये सीट कांग्रेस के खाते में गई है

शॉटगन की दमदार दावेदारी
पटना साहिब सीट से शत्रुघ्न सिन्हा लगातार दो बार चुनावी जंग फतह कर चुके हैं। दोनों बार वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते। जिसके बाद ये माना जाने लगा है कि पटना साहिब सीट पर कायस्थ मतदाताओं का झुकाव बीजेपी के पक्ष में रहता है। लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा इस बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे हैं। ऐसे में कायस्थ वोट शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस के टिकट पर उतरने से यहां मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. कांग्रेस के टिकट से चुनाव मैदान में आने से शत्रुघ्न को महागठबंधन के तहत यादव, मुस्लिम, दलित मतों का समर्थन मिल सकता है. इसके अलावा कायस्थ के वोटों में भी शत्रुघ्न सेंधमारी कर सकते हैं.

रविशंकर प्रसाद की कमजोरी कड़ी
वहीं, रविशंकर प्रसाद पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं. ऐसे में कायस्थों मतों के साधने के साथ-साथ बीजेपी के परंपरागत वोटों को भी साधने की बड़ी चुनौती है. जिस तरह से आरके सिन्हा के समर्थक लगातार उनकी मुखालफत कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें भितरघात से भी निपटना पड़ सकता है.

पटना का सियासी समीकरण
पटना साहिब लोकसभा सीट शुरू से कांग्रेस, सीपीआई और बीजेपी का गढ़ रहा है. सारंगधर सिन्हा यहां के पहले सांसद थे. रामदुलारी सिन्हा ने 1962 में कांग्रेस की ओर से यहां का प्रतिनिधित्व किया था. वहीं सीपीआई की टिकट पर राम अवतार शास्त्री यहां से तीन बार सांसद चुने गए. 1977 में इंदिरा विरोधी लहर में लोकदल के महामाया प्रसाद सिन्हा लोकसभा में पहुंचे. सीपी ठाकुर एक बार कांग्रेस और दो बार बीजेपी से लोकसभा पहुंच चुके हैं. 1989 में बीजेपी से शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं. रामकृपाल यादव भी यहां से तीन बार आरजेडी के टिकट पर सांसद चुने जा चुके हैं. 2009 में परिसीमन के बाद पटना जिला की दो सीटें बनी. इसमें एक पाटिलपुत्र और दूसरी पटना साहिब सीट. पटना साहिब सीट से शत्रुघ्न सिन्हा लगातार दो बार चुनावी जंग फतह कर चुके हैं, लेकिन इस बार लड़ाई बदल गई है और शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर के बीच टक्कर होगी.

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