
सूबे के 115 पैक्सों में इस साल ड्रायर के साथ चावल मिल लगेंगे। हर राइस मिल की क्षमता दो टन प्रति घंटा होगी। खास बात ये है कि केन्द्र सरकार लागत राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा देगी। जबकि राज्य सरकार को केवल 40 प्रतिशत पैसा ही लगाना होगा। जबकि पहले केन्द्र और राज्य सरकार को आधा-आधा पैसा देना होता था ।
ड्रायर के साथ राइस मिल पर कितना आएगा खर्च
पैक्सों में एक राइस मिल और ड्रायर लगाने पर 77.45 लाख रुपये खर्च होंगे। जिसमें 59.45 लाख राइस मिल पर खर्च होंगे और 18 लाख रुपये ड्रायर पर। ये सभी मिल बिजली से चलेंगे। जिन पैक्सों या व्यापार मंडलों में मिल लगाना है उनके चयन की जिम्मेदारी प्रमंडलीय संयुक्त निबंधक व सहयोग समितियों को दी गई है।
जमीन की व्यवस्था पैक्सों को करनी होगी
जमीन की व्यवस्था भी पैक्सों को ही करनी है। दान के माध्यम से जमीन ले सकते हैं। लेकिन अगर जमीन खरीदनी पड़ी तो इसकी व्यवस्था भी पैक्सों या व्यापार मंडलों को ही करनी होगी। लीज पर भी जमीन ली जा सकती है। हालांकि मिल के निर्माण का नक्शा सहकारिता विभाग ने स्वीकृत किया है, उसी के आधार पर मिल का मकान बनेगा।
नमी की वजह से ड्रायर लगाने का फैसला
सरकार ने बिजली आपूर्ति में सुधार के बाद बिजली आधारित चावल मिल लगाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था में अब गैसीफायर आधारित चावल नहीं बनेंगे। धान में नमी को देखते हुए ड्रायर लगाने का फैसला लिया गया है।