Home खास खबरें नव नालंदा महाविहार के रजिस्ट्रार डॉ. एसके सिन्हा सस्पेंड.. जानिए पूरा मामला

नव नालंदा महाविहार के रजिस्ट्रार डॉ. एसके सिन्हा सस्पेंड.. जानिए पूरा मामला

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नालंदा में स्थित नव नालंदा महाविहार (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के रजिस्ट्रार ( कुल सचिव) डॉ. एसके सिन्हा को सस्पेंड कर दिया गया. नव नालंदा महाविहार के कुलपति ने डॉक्टर एसके सिन्हा को निलंबित कर उनका प्रभार प्रोफेसर राजेश रंजन को सौंप दिया है .

क्या है पूरा मामला
दरअसल, पिछले कई सालों से रजिस्ट्रार डॉ. एस के सिन्हा और पालि विभाग के प्रो. राजेश रंजन के बीच पद को लेकर विवाद चल रहा था. रजिस्ट्रार डॉ. एसके सिन्हा ने प्रो. राजेश रंजन पर फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी करने का आरोप लगाया था

रजिस्ट्रार ने की थी सीबीआई जांच की मांग
प्रो. राजेश रंजन के फर्जी सर्टिफिकेट को लेकर रजिस्ट्रार डॉ सुनील प्रसाद सिन्हा ने सीबीआई जांच की मांग की थी. उन्होंने इस सिलसिले में रजिस्टार को पत्र लिखा था. जिसमें कहा गया था प्रो. राजेश रंजन फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी कर रहे हैं . जिसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। ऐसे में सवाल ये उठने लगा है कि जिनके खिलाफ सीबीआई जांच की मांग उठी थी उन्हें वाइस चांसलर बना दिया गया है

वाइस चांसलर का क्या है कहना
वहीं, नव नालंदा महाविहार के वाइस चांसलर का कहना है कि रजिस्ट्रार मनमाने ढंग से काम कर रहे थे। उन्होंने प्रो. राजेश रंजन के फर्जी सर्टिफिकेट मामले में कहा कि इस मामले की जांच सेंट्रल विजिलेंस टीम ने की थी। जिसमें विजिलेंस की टीम ने साल 2015 में ही आरोपों को खारिज करते हुए प्रो. राजेश रंजन को क्लीनचिट दे दिया था

प्रो. राजेश रंजन का क्या है कहना
वहीं प्रोफेसर राजेश रंजन ने फर्जी सर्टिफिकेट के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नव नालंदा महाविहार के ही एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया था. साथ ही मुख्य सतर्कता आयुक्त नई दिल्ली और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसमें पटना हाईकोर्ट ने साल 2013 में ही केस को खारिज कर दिया गया था। जबकि संस्कृति मंत्रालय और मुख्य सतर्कता आयुक्त ने साल 2015 में ही क्लीनचिट दे दिया था.

क्या है फर्जी डिग्री का मामला
दरअसल, प्रो राजेश रंजन पर एक ही सत्र में दो डिग्री हासिल करने का आरोप है. इस मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक कमिटी ने मामले की जांच की थी. जिसमें प्रो. राजेश रंजन को क्लीनचिट मिल गया था. जबकि मगध विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने उन्हें नया प्रमाण पत्र जारी किया था।

अंदर की बात क्या है
इससे पहले भी डॉ एसके सिन्हा को रजिस्ट्रार के पद से हटाकर प्रो.राजेश रंजन को रजिस्ट्रार बनाया गया था. लेकिन बाद पटना हाईकोर्ट ने दोबारा डॉ.एसके सिन्हा को रजिस्ट्रार बना दिया था. नालंदा लाइव ने जब इस बारे में नव नालंदा महाविहार के कई प्राध्यपकों से बात की तो कई अंदर की बात सामने आई. नाम न छापने की शर्त पर लोगों ने बताया कि इस मामले प्रो .शिव बहादुर सिंह ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी. लेकिन बाद में उन्होंने अपनी शिकायत वापस ले थी. ऐसे में लोगों ने दबी जुबान कई सवाल पूछे
सवाल नंबर 1. अगर क्लीनचिट मिला है तो वो ऑर्डर कहां है
सवाल नंबर 2. सीवीसी ने अगर क्लीनचिट दिया है तो फिर इसकी जानकारी डॉ एसके सिन्हा को क्यों नहीं है जबकि वो उस वक्त रजिस्ट्रार के पद पर तैनात थे. ऐसे में कोई भी पत्राचार उनकी जानकारी के बिना नहीं हो सकता है
सवाल नंबर 3. अगर प्रो. राजेश रंजन के पास दस्तावेज हैं तो फिर वो उसकी फोटोकॉफी ही सर्टिफाई कराकर वीसी ऑफिस में क्यों नहीं जमा करा देते हैं .

ऐसे में इन सवालों को जवाब आने वाले दिनों में प्रो. राजेश रंजन को देना पड़ सकता है। क्योंकि इस मामले में निलंबित रजिस्ट्रार एसके सिन्हा इंसाफ के लिए संस्कृति मंत्रालय से लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं

पटना हाईकोर्ट का जजमेंट पढ़ने के लिए क्लिक कीजिए-https://indiankanoon.org/doc/15164918/ 

 

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