शाहनवाज हुसैन और सुशील कुमार मोदी के बीच है खास रिश्ता.. शायद आप लोग नहीं जानते होंगे?..

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बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन के बीच एक खास रिश्ता है. जिसे शायद आपलोग नहीं जानते हैं. हालांकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में शाहनवाज हुसैन के चुनाव हारने के बाद से उनके रिश्ते सुशील कुमार मोदी के साथ तल्ख बताए जाते रहे, लेकिन सार्वजनिक मंच से दोनों नेताओं ने कभी भी एक दूसरे के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है। दोनों नेताओं के बीच अंदरुनी कैसे रिश्ते हैं ये तो वो दोनों ही जानें, लेकिन आज हम आपको दोनों नेताओं के बीच एक खास किस्म के रिलेशन के बारे में बता रहे हैं.

उत्तराधिकारी रहे हैं शाहनवाज
शाहनवाज हुसैन पुर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी से 17 साल छोटे हैं। लेकिन दोनों के बीच खास किस्म का रिश्ता है। शाहनवाज हुसैन हमेशा से सुशील कुमार मोदी का उत्तराधिकारी बनते रहे हैं। यानी सुशील कुमार मोदी जो कुर्सी छोड़ते हैं शाहनवाज हुसैन हमेशा से उसी कुर्सी को संभालते रहे हैं।

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2006 में शाहनवाज का राजनीतिक पुनर्जन्म
साल 1990 से साल 2004 के लोकसभा चुनाव के पहले तक सुशील कुमार मोदी पटना मध्य विधानसभा सीट (कुम्हरार) से विधायक बनते रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में सुशील कुमार मोदी भागलपुर लोकसभा सीट से सांसद बने। हालांकि साल 2005 में बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद सुशील कुमार मोदी संसद की सदस्यता से त्याग पत्र देकर बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गए।
उधर 1999 में किशनगंज से सांसद बने शाहनवाज हुसैन 2004 का लोकसभा चुनाव हार गए।

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सुशील मोदी की सीट से उपचुनाव जीते
देश की राजनीति में बने रहने के लिए किसी नेता का चुनाव में जीतते रहना कितना जरूरी होता है यह किसी से छुपी बात नहीं है। सुशील मोदी के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुए भागलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में शाहनवाज हुसैन बीजेपी की ओर से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। इस तरह भागलपुर लोकसभा सीट पर शाहनवाज हुसैन सुशील कुमार मोदी के पहली बार उत्तराधिकारी बने। शाहनवाज 2009 में भी इसी सीट से सांसद बने।

हार के बाद बढ़ी तल्खी
2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़कर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया था। बिहार सरकार से बीजेपी के अलग होने से सुशील कुमार मोदी खाली हो गए थे। इस वजह से वह भागलपुर लोकसभा सीट से 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ना चाह रहे थे, लेकिन पार्टी ने एक बार फिर से शाहनवाज हुसैन को ही भागलपुर सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया था। इस चुनाव में शाहनवाज हुसैन की हार हुई थी। चुनाव के पहले ही शाहनवाज हुसैन जान चुके थे कि वह इस सीट पर हारने वाले हैं, शायद इसी वजह से उन्होंने उस दौरान बयान दिया था कि सुशील मोदी को अगर भागलपुर सीट से चुनाव में उतरना चाहते हैं तो वह इसका स्वागत करेंगे। चुनाव में जब शाहनवाज हुसैन की हार हुई तो ये बात बिहार की राजनीतिक गलियारे में जगजाहिर थी कि सुशील कुमार मोदी का साथ नहीं मिलने के चलते शाहनवाज हुसैन सांसद का चुनाव हारे।

2021 में उत्तराधिकारी बने शाहनवाज
2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद से शाहनवाज हुसैन राजनीतिक वनवास का दौर गुजार रहे थे। अब एक बार फिर से सुशील कुमार मोदी राज्यसभा गए हैं तो उनकी सीट से शाहनवाज हुसैन विधान परिषद सदस्य बने। यानी एक बार फिर से सुशील मोदी का उत्तराधिकारी बनकर शाहनवाज मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स में एंट्री मारी है।

सुशील मोदी वाले विभाग मिलेंगे ?
साल 2004 में सुशील कुमार मोदी की ओर से छोड़ी गई कुम्हरार विधानसभा सीट से अरुण कुमार लगातार विधायक बनते आ रहे हैं। अब ये भी चर्चा है कि विधान परिषद सदस्य बनने के बाद शाहनवाज हुसैन नीतीश कैबिनेट में भी शामिल किए जा सकते हैं और उन्हें मौजूदा उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से कुछ अहम मंत्रालय लेकर सौंप जा सकता है। यहां बता दें कि तारकिशोर प्रसाद को सुशील मोदी के पास रहने वाले सारे मंत्रालय सौंपे गए हैं।

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