
देश की राजधानी दिल्ली की तरह अब बिहारशरीफ में भी तीसरी आंख के जरिए नजर रखी जाएगी. यानि तीसरी आंख से कोई भी अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद बच नहीं पाएगा. शहर में 500 सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे। ये कैमरे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के इंटेग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर के तहत लगाए जाएंगे
15 में से 5 कंपनियों का चयन
सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 15 कंपनियों ने टेंडर डाला था। जिसमें से 5 कंपनी ही डेमोस्ट्रेशन के लिए योग्य पायी गयी। अब ये कंपनियां शहर के अलग-अलग चौक-चौराहों व महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगा रही है। ताकि डेमोस्ट्रेशन दे सके। 15 में से जिन 5 कंपनियों का डेमोस्ट्रेशन के लिए चयन हुआ है उसमें ऑर्गेनिक विशिनपो सर्विसेज, केईसी इंटरनेशनल लिमिटेड, वी सॉफ्ट ऑक्नोलॉजी प्राईवेट लिमिटेड, इफकॉन इंडिया प्राईवेट लिमिटेड और बिंदिया लिमिटेड नई दिल्ली शामिल हैं
नालंदा कॉलेज में होगा डेमोस्ट्रेशन
बिहारशरीफ के नगर आयुक्त सौरभ जोरवाल के मुताबिक अभी शहर के अंदर 60 कैमरे लगाये गये हैं। कुल 500 कैमरे लगाये जाने हैं। कैमरा काफी पावरफुल होगा जो काफी दूर और भागते हुए लोगों की तस्वीर भी स्पष्ट लेगा। शहर के हॉस्पीटल मोड पर डेमोस्ट्रेशन के लिए कैमरे लगाए गए हैं. सोमवार को नालंदा कालेज में डेमोस्ट्रेशन किया जायेगा। इस दौरान टेंडर कमिटी के सदस्य द्वारा अंक दिये जायेंगे।
अंक के आधार पर होगा चयन
सभी कंपनियों को अलग-अलग इलाके और चौराहे दे दिये गये हैं। जहां वह अपने स्तर से कैमरा लगा रही है। स्मार्ट सिटी के सीईओ सौरव जोरवाल ने बताया कि शहर के अंदर यातायात, पानी लिकेज, प्रदूषण सहित सभी तरह की गतिविधियों पर कमांड कंट्रोल सेंटर से नजर रखी जायेगी। इसके लिए सीसीटीवी लगाया जायेगा। इसके लिए सभी टेक्निकल पहलूओं का डेमोस्ट्रेशन होगा। अंक के आधार कंपनी का चयन किया जायेगा। डेमोस्ट्रेशन का उद्देश्य कंपनियों की तकनीकी क्षमता का आकलन करना है। डेमोस्ट्रेशन से यह पता चल जायेगा कि किस कंपनी के पास शहर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कितनी आधुनिक तकनीक है। वित्तीय टेंडर खुलने के समय डेमोस्ट्रेशन में मिले अंक को देखा जायेगा। जिस कंपनी का तकनीकी अंक ज्यादा और लागत कम होगी उसी को टेंडर दिया जायेगा।
सेंसर भी लगेगा
आईसीसीसी के तहत शहर में सेंसर भी लगाये जाने हैं। सीसीटीवी के बाद सेंसर का डेमोस्ट्रेशन होगा। सेंसर के माध्यम से शहर के गली मुहल्लों में पानी लिकेज, कचरा उठाव और अन्य प्रबंधन का काम होगा। इसकी निगरानी इंटेग्रेटेड कमांड कंट्रोल सिस्टम से की जायेगी। तकनीकी स्वीकृति के लिए सेंसर सिस्टम पर भी अंक दिये जायेंगे।