
नालंदा जिला के सामाजिक कार्यकर्ता दिलखुश कुमार की कोशिशों पर उस वक्त पानी फिर गया जब रेलवे ने डियावां हॉल्ट को स्टेशन का दर्जा देने से इनकार कर दिया। करायपरशुराय के रहने वाले दिलखुश ने डियावां हॉल्ट को स्टेशन का दर्जा दिलाने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक खत लिखा था। राष्ट्रपति मुख्यालय ने इस खत को पूर्व मध्य रेलवे को भेज दिया और उचित कार्यवाही करने को कहा। राष्ट्रपति भवन से आए खत के जवाब में जब रेलवे ने इसकी जांच की तो उसने दिलखुश की मांग को ठुकरा दिया।
कहां है डियावां हॉल्ट
फतुहां-इस्लामपुर रेलखंड पर डियावां हॉल्ट है। इस रेलखंड पर चार ट्रेनें चलती हैं। लेकिन सिर्फ एक ट्रेन पटना-इस्लामपुर ही डियावां हॉल्ट पर रुकता है। ऐसे में करायपरशुराय के रहने वाले दिलखुश कुमार ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर डियावां हॉल्ट को स्टेशन बनाने की मांग की थी।
रेलवे ने क्यों ठुकराई मांग जानिए
पूर्व मध्य रेलवे के मुताबिक स्टेशन का दर्ज उसी को दिया जा सकता है जहां प्रतिदिन कम से कम यात्रियों की संख्या 300 से ज्यादा होनी चाहिए साथ ही सालाना 9 लाख से ज्यादा का टिकट की बिक्री होनी चाहिए। जबकि डियावां हॉल्ट इन दोनों में से किसी भी मापदंड पर खरा नहीं उतरता है । डियावां हॉल्ट से प्रतिदिन औसतन 33 यात्री और प्रतिदिन की आय 333 रुपया है । ऐसे में डियावां हॉल्ट का अपग्रेडेशन के लिए वाणिज्यक औचित्य नहीं बनता है।
डियावां को स्टेशन न बनाए जाने की मांग खारिज होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि रेल विभाग की इस पॉलिसी से हम हतोत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि फतुहा-इस्लामपुर रेल खंड पर चार ट्रेन चलती है । उसमे एक मात्र ट्रेन पटना-इस्लामपुर ट्रेन का ठहराव होता है । अगर तीन अन्य ट्रेन हटिया एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, राजगीर फतुहा-इस्लामपुर पैसेंजर ट्रेन का ठहराव डियावां स्टेशन पर हो जाता है।तो इस स्टेशन से प्रतिदिन 300 से भी ज्यादा टिकट की बिक्री हो सकेगी।
लेकिन नालंदा लाइव दिलखुश से कहना चाहता है कि आप हिम्मत मत हारना समाज के लिए कुछ करना है तो अपनी प्रयास जारी रखो। साथ ही डियावां हॉल्ट पर यात्रियों को समझाएं कि बेटिकट यात्रा न करें। ताकि रेलवे की आय बढ़े और डियावां को स्टेशन का दर्जा मिल सके