दो समलैंगिक लड़कियों ने रचाई शादी.. घर में बवाल.. थाना पहुंचा मामला..

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समलैंगिक शादियों की बात पहले पश्चिमी देशों में होती थी. फिर देश के बड़े बड़े शहरों में इसका प्रचलन शुरू हुआ. अब बिहार के गांव देहात में भी दस्तक देने लगा है. जहां दो लड़की पहले सहेली थी. अब पति पत्नी बन गई और साथ जीने मरने की कसम खा रही है.

क्या है पूरा मामला
दरअसल, दो लड़कियां आस पड़ोस में रहती थी. दोनों पहले एक दूसरे की सहेली बन गई. दोनों एक दूसरे के साथ खेलते थे एक दूसरे के साथ ही रहते थे. लेकिन दोनों के बीच एक अप्राकृतिक रिश्ता पनप गया. दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे. मामला बगहा के नगमा और बेतिया की इसरत का है. नगमा पति बन गया है और इसरत बेगम यानि पत्नी बन गई

दोनों ने रचा ली शादी
दोनों का कहना है कि वे दोनों ने शादी रचा ली है और एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते हैं. दोनों समलैंगिक लड़कियां थाने पहुंच गई और कहा कि वे दोनों पति पत्नी हैं. दोनों लड़कियों ने बताया कि उन्होंने समलैंगिक विवाह जालंधर के न्यायालय में की है। दोनों एक-दूसरे के बगैर नहीं रह सकते हैं। लेकिन उनके परिवार वाले इस रिश्ते को मानने से इन्कार कर रहे हैं।

पुलिस से लगाई सुरक्षा की गुहार
वे दोनों बेतिया थाना पहुंचे और पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई. जिसपर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पत्नी के घरवालों से पूछताछ की तो लड़की के घरवालों ने अपनी बेटी से किसी भी तरह का रिश्ता रखने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों प्रेमी युगल को रामनगर स्थित पति के घर पर भेज दिया है।

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पत्नी बनी लड़की के पिता ने क्या कहा
बेतिया की रहने वाली इसरत के पिता हजरत ने बताया कि उनका परिवार जालंधर में रहता था. वहीं, पड़ोस में बगहा के रामनगर की रहने वाली नगमा खातून भी रहती थी और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। हालांकि घरवालों ने दोनों को समझाने का बहुत प्रयास किया लेकिन दोनों एक-दूसरे के साथ जीने-मरने को तैयार थीं।
वहीं घरवालों के विरोध को देखते हुए पति-पत्नी बने दोनों लड़की नगर थाने पहुंची जहां पुलिस ने जांच पड़ताल की।

पति नगमा के घर में रहेगी इसरत
नगमा और उसकी पत्नी इसरत को रामनगर स्थित उसके घर पर पुलिस की सुरक्षा में भेज दिया है। ऐसे में देखना होगा कि अब पति बनी नगमा के घरवाले अपनी बेटी की बहू को स्वीकार करते हैं या फिर समलैंगिक विवाह करने वाले इस प्रेमी जोड़े के प्यार की नाव कहां तक पहुंचती है।

क्या कहता है कानून
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दो साल पहले अपने आदेश में समलैंगिकता को मान्यता दे दी है. अदालत ने कहा था कि इसे लेकर किसी भी तरह का भेदभाव मौलिक अधिकारों का हनन होगा. अदालत का ये भी कहना था कि अंतरंगता और निजता किसी की भी व्यक्तिगत पसंद होती है. दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने यौन संबंध पर आईपीसी की धारा 377 संविधान के समानता के अधिकार, यानी अनुच्छेद 14 का हनन करती है.

पहले क्या था नियम
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध माना गया है. आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक, जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सज़ा या आजीवन कारावास दिया जाएगा. इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है. यह अपराध ग़ैर ज़मानती है.

समलैंगिक शादी को लेकर अभी क्या है
आपको बता दें कि अदालत ने भले ही समलैंगिकता को धारा 377 के बाहर रखा है . लेकिन समलैंगिक शादी को अब तक मान्यता नहीं दी गई है.

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