
नालंदा लोकसभा सीट से एनडीए का प्रत्याशी कौन होगा। इसे लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है । लेकिन ये तो तय है कि नालंदा की सीट जेडीयू को दी जायेगी. हालांकि औपचारिक ऐलान से पहले रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी ने भी अपनी दावेदारी ठोंक दी है । नालंदा लोकसभा सीट के पूर्व प्रत्याशी सत्यानंद शर्मा ने ये दावेदारी ठोकी है ।
जेडीयू से किया ‘चेहरा’ बनाने की मांग
लोक जनशक्ति पार्टी के महासचिव और नालंदा सीट के पूर्व प्रत्याशी डॉक्टर सत्यानंद शर्मा का कहना है कि वो नालंदा से चुनाव लड़ने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर से इच्छा जताई है । उन्होंने नीतीश कुमार से उनके गृह जिला का ‘चेहरा’ बनाने का अनुरोध किया है.

नीतीश कुमार के गढ़ में दी थी कड़ी टक्कर
नालंदा में 2014 में जेडीयू के कौशलेंद्र कुमार को जीत मिली थी. उन्होंने दूसरे नंबर पर रहे लोजपा के डॉ सत्यानंद शर्मा को 9627 वोटों से हराया था. कौशलेंद्र को तीन लाख 21 हजार 982 वोट मिले थे. चुनाव वैतरणी में डॉ सत्यानंद शर्मा की नाव किनारे पर आकर तब डूबी थी, जब नीतीश कुमार एनडीए के विरोध में थे.
2019 में जदयू एनडीए का हिस्सा है. डॉ सत्यानंद अब इस सियासी अवसर को गंवाने के मूड में नहीं हैं. वो साफगोई से बताते हैं कि नालंदा उनकी सीट है, लेकिन जेडीयू के एनडीए में आने से स्थिति बदली है. डॉ सत्यानंद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे अपना उम्मीदवार बदलकर उनको अपना (एनडीए) उम्मीदवार घोषित कर दें. वहीं, लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान भी अपने महासचिव को लेकर चिंतन कर रहे हैं. लोजपा डॉ सत्यानंद शर्मा को किसी पिछड़ा बाहुल्य सीट से भी चुनाव लड़ा सकती है.