मंजू वर्मा का ब्यूटी पार्लर चलाने से लेकर मंत्री बनने तक का सफर.. जानिए

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बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा का सियासी सफर उतार चढ़ाव भरा रहा. पंचायत समिति का चुनाव हारने वाली मंजू वर्मा बिहार में राजनीति की शिखर तक कैसे पहुंचीं ? कभी ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मंजू वर्मा कैसे बिहार सरकार में मंत्री बन गई? कितना रसूखवाला है मंजू वर्मा का पति ? कब हुआ मंजू वर्मा के जीवन में चमत्कार ?

कभी ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मंजू वर्मा कैसे बनी मंत्री

ब्यूटी पार्लर चलाने से लेकर नीतीश सरकार में मंत्री बनने और फिर मंत्री पद छिनने तक का मंजू वर्मा का सफर काफी दिलचस्प है. शादी के कुछ सालों बाद मंजू वर्मा पटना आ गईं. वो पटना में ही ब्यूटी पार्लर चलाने लगीं. साथ ही बच्चों की परवरिश भी कर रही थीं. लेकिन मंजू वर्मा के पति उन्हें राजनीति में लाना चाहते थे

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विरासत में मिली सियासत

मंजू वर्मा को राजनीति उनके ससुराल से विरासत में मिली। मंजू वर्मा के ससुर सुखेदव महतो 1980 से 1985 चेरिया बरियारपुर विधानसभा से सीपीआई के विधायक थे। 1985 में टिकट कट जाने के बाद नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन वो चुनाव हार गए।

चंदेश्वर वर्मा ने कभी नहीं लड़ा चुनाव

मंजू वर्मा के पति चंदेश्वर वर्मा को विरासत में राजनीति मिली। लेकिन वो कभी खुद चुनाव नहीं लड़ा। शुरू में वो सीपीआई और फिर भाकपा माले से जुडा.  1995 से 2003 तक भाकपा माले में रहा। इसके बाद 2003 में लालू यादव की शरण में चला गया.  2005 के चुनाव में चंद्रेश्वर वर्मा ने अनिल चौधरी को जिताने में मदद की।

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पंचायत चुनाव हार गईं थी मंजू वर्मा

चंदेश्वर वर्मा को राजनीति में अपने लिए जगह न मिलता देख पत्नी मंजू वर्मा को सियासत में उतारा. लेकिन मंजू वर्मा की राजनीति में शुरुआत अच्छी नहीं रही. मंजू वर्मा ने सबसे पहले साल 2006 में अपने गांव श्रीपुर पंचायत से पंचायत समिति का चुनाव लड़ा. लेकिन वो इसमें हार गईं.

2007 में जेडीयू का दामन थामा

साल 2006 में पंचायत समिति चुनाव में पत्नी की हार के बाद मंजू वर्मा के पति चंदेश्वर वर्मा ने 2007 में जेडीयू का दामन थाम लिया। चंदेश्वर वर्मा पार्टी में खुद को कोइरी वर्ग का नेता बता कर टिकट मांगने लगा. राजनीति विरासत में मिली थी. इसलिए चंद्रेश्वर वर्मा को सारा गणित मालूम था

2010 में मंजू वर्मा की किस्मत चमकी

जेडीयू में शामिल होने के महज तीन साल बाद ही चंदेश्वर वर्मा की किस्मत बदल गई. साल 2010 में चंदेश्वर वर्मा  ने अपनी पत्नी मंजू वर्मा को  चेरिया बरियारपुर से जेडीयू का टिकट  दिलवा दिया. पंचायत चुनाव हार चुकी मंजू वर्मा को भी जीत का भरोसा नहीं था. लेकिन 2010 के चुनाव में नीतीश की लहर में मंजू वर्मा के सितारे चमक उठे. उनकी किस्मत खुल गई और मंजू वर्मा चुनाव जीतकर विधायक बन गईं

महागठबंधन ने दिलाया मंत्री पद

साल 2010 में  मंजू वर्मा पहली बार विधानसभा की सदस्य बनीं। फिर 2015 में उन्हें महागठबंधन का फायदा मिला और वो फिर जेडीयू के टिकट पर से चुनाव जीत गईं। नवंबर 2015 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी महागठबंधन की सरकार में वो समाज कल्याण मंत्री बनीं और तब से अबतक गठबंधन बदला लेकिन विभाग मंजू वर्मा के पास ही रहा।

चंदेश्वर की रसूख ने दिलाया समाज कल्याण विभाग

कहा जाता है कि समाज कल्याण विभाग पर चंदेश्वर वर्मा की पहले से ही अच्छी पकड़ थी. ऐसे में वो अपनी रसूख की वजह से पत्नी को मंत्री बनवाया और समाज कल्याण विभाग दिलाया. सूत्र ये भी बताते हैं कि समाज कल्याण विभाग का पूरा कामकाज में चंदेश्वर वर्मा के ही हाथ में था

मंजू वर्मा के राजनीतिक कैरियर पर लगा ग्रहण

अपने छोटे से ही राजनीतिक जीवन में मंजू वर्मा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की, लेकिन राजनीति में सितारे की तरह चमकने वाली मंजू वर्मा और उनके पति चंदेश्वर वर्मा पर बालिका गृह यौनशोषण जैसे मामले में आरोप लगा और उनकी चमक फीकी पड़ गई।

सीपीओ की पत्नी ने किया था खुलासा

मंजू वर्मा और उनके पति दोनों तब लाइमलाइट में आए जब मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौनशोषण कांड में गिरफ्तार चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रवि रौशन की पत्नी शिवा ने आरोप लगाया कि मंत्री के पति अक्सर ब्रजेश ठाकुर के बालिका गृह में आते थे उनसे भी पूछताछ की जाए।

हालांकि उसके आरोप के बाद मंजू वर्मा और उनके पति चंदेश्वर वर्मा के खिलाफ कोई सबूत नहीं होने के आधार पर मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री ने उनका बचाव किया था। लेकिन मुख्यमंत्री ने घटना को शर्मनाक बताया था और कहा था कि इस मामले में सबूत मिलने पर किसी को नहीं बख्शा जाएगा चाहे वह कोई मंत्री ही क्यों ना हो।

मंजू वर्मा ने आनन-फानन में दिया इस्तीफा 

सीबीआइ ने ब्रजेश वर्मा के फोन का कॉल डिटेल्स खंगाला तो पता चला कि चंदेश्वर वर्मा की बालिका गृह मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के बीच 17 बार बातचीत हुई है.  इसके बाद कोर्ट में पेशी के दौरान ब्रजेश ठाकुर ने सार्वजनिक तौर पर कबूला था कि फोन पर उसकी चंदेश्वर वर्मा से बातचीत होती थी

बयान के बाद मंजू वर्मा का इस्तीफा

ब्रजेश ठाकुर के बयान के ठीक दो घंटे बाद  मंजू वर्मा को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। माना जा रहा है कि मुजफ्फरपुर कांड में जिस तरह से चंदेश्वर वर्मा फंसते जा रहे हैं उसमें से उनका निकलना संभव नहीं ंहै। क्योंकि 9 बार मुजफ्फरपुर के बालिक सुधार गृह गए थे।

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