सांसद किंग महेंद्र के घर में भयंकर कलह.. जानिए दिल्ली हाईकोर्ट को क्यों बनानी पड़ी कमेटी

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बिहार के जाने माने उद्योगपति और जेडीयू के राज्यसभा सांसद किंग महेंद्र की संपत्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा । जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने गार्जियनशिप कमेटी बनाने का निर्देश दिया है । जो संपत्ति विवाद का निदान निकालेगी।

गार्जियन कमेटी में कौन कौन
जदयू के राज्यसभा सदस्य और नामी उद्योगपति डॉ.महेंद्र प्रसाद (किंग महेंद्र) के बहुचर्चित घरेलू और संपत्ति विवाद के निदान का दिल्ली हाईकोर्ट ने गार्जियनशिप कमेटी बनाने का निर्देश दिया है । जिसमें किंग महेंद्र की पहली पत्नी सतुला देवी, बड़ा बेटा राजीव शर्मा और भाई उमेश शर्मा होंगे। ये कमेटी किंग महेंद्र से जुड़े हर मामले के बारे में सर्वसम्मति से निर्णय लेगी। इलाज कराने से लेकर उनकी सम्पत्ति और वित्तीय संचालन के निष्पादन सहित अन्य मामलों पर निर्णय का अधिकार कमेटी को दिया गया है। लेकिन अगर किसी मुद्दे पर आपसी सहमति नहीं बनती है और सर्वसम्मति से निर्णय नहीं हो पाता है, तो उसे कोर्ट द्वारा नियुक्त सुपरवाइजिंग गार्जियन (रिटायर्ड जस्टिस राजीव सहनी) के पास भेजा जाएगा और उनका निर्णय ही मान्य होगा। यह व्यवस्था 3 साल के लिए है।

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कमेटी में दूसरी पत्नी नहीं
कोर्ट ने दूसरी पत्नी होने का दावा करने वाली महिला ऊमा देवी और एक बेटा और पुत्रवधू को कमेटी में नहीं रखा। हालांकि उनकी दूसरी पत्नी होने का दावा करने वाली उमा देवी अगर उनके आवास में रहना चाहती हैं तो रह सकती हैं।

क्या है विवाद
आपको बता दें कि किंग महेंद्र बिहार से 7वीं बार राज्यसभा पहुंचे हैं । किंग महेंद्र की हालत नाजुक बनी हुई है। वे न तो किसी को पहचान पाते हैं और न ही कुछ समझ पाते हैं। उनका 3000 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार है। उनकी सम्पत्ति को लेकर विवाद गहराता गया और मुकदमेबाजी का दौर शुरु हो गया।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में क्या है
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम.सिंह ने विवाद के निपटारे के लिए गार्जियनशिप कमेटी का रास्ता निकाला है। अपने 147 पन्ने के आदेश में उन्होंने हर पहलू पर प्रकाश डाला है। किंग महेंद्र का बेहतर इलाज और देखभाल हो सके, उनका कारोबार भी चलता रहे, इसके मद्देनजर कोर्ट ने फिलहाल तीन साल के लिए उक्त एक व्यवस्था बनाई है। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक किंग महेंद्र नई दिल्ली स्थित अपने आवास में ही रहेंगे। अगर उनकी पत्नी चाहेंगी तो परिवार के किसी महिला सदस्य के साथ वहां रह सकती हैं। उनकी दूसरी पत्नी होने का दावा करने वाली उमा देवी अगर उनके आवास में रहना चाहती हैं तो रह सकती हैं।

हर 15 दिन पर रिपोर्ट
कमेटी हर 15 दिन पर सुपरवाइजिंग गार्जियन को अपने लिए गए निर्णय से अवगत कराएगी। सुपरवाइजिंग गर्जियन हर छह महीने पर अपनी प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे। इस कार्य के लिए जस्टिस राजीव सहनी को किंग महेंद्र के खाते से हर महीने तीन लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा। इसमें ऑफिस, यात्रा या अन्य कोई भी खर्च शामिल नहीं होगा।

कौन है किंग महेंद्र
डॉ. महेंद्र प्रसाद का जन्म 1940 में बिहार के जहानाबाद ज़िले के गोविंदपुर गांव के एक साधारण भूमिहार परिवार में हुआ था। छोटी उम्र में ही व्यवसायी बनने का सपना लेकर वह मुम्बई चले गए। उनके शुरुआती दिनों के बारे में ज़्यादा नहीं पता पर अन्ततः वह बिहार के ही एक अन्य भूमिहार फार्मा टायकून सम्प्रदा सिंह के साथ काम करने लगे। 1971 में 31 साल की उम्र में प्रसाद ने अपनी स्वयं की फैक्ट्री, एरिस्टो फार्मास्युटिकल्स की नींव रखी। उनके गांव ले लोग बताते हैं कि उसके बाद से उनकी संपत्ति लगातार बढ़ी है।

सियासी सफर
1980 में प्रसाद ने जहानाबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीता। उस समय यह ज़िला सवर्णों एवं नक्सलियों के बीच चल रहे एक ख़ूनी खेल का केंद्र बना हुआ था। हालांकि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए 1984 के आम चुनावों में उनको अपनी सीट से हाथ धोना पड़ा। 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें पहली बार राज्यसभा के लिए नामित किया। प्रसाद को कांग्रेसी नेता माखनलाल फोतेदार के करीबी होने का भी फायदा मिला क्योंकि फोतेदार स्वयं राजीव और इंदिरा के करीबी थे । सितंबर 1985 में जब पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था तब कांग्रेस ने उन्हें अमृतसर की लोकसभा सीट के लिए एक आब्जर्वर की हैसियत से भेजा। बाटला में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक सभा में जाने के क्रम में उनकी कार में धमाका हुआ जिससे उनकी जान जाते-जाते बची। 1986 में वे फिर से राज्यसभा के लिए चुन लिए गए। तब से वे लगातार राज्यसभा सांसद हैं

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