Home हमारे हीरो पद्म भूषण हुकुमदेव नारायण यादव की अनकही और अनसुनी बातें… जानिए

पद्म भूषण हुकुमदेव नारायण यादव की अनकही और अनसुनी बातें… जानिए

हुकुमदेव नारायण यादव (Hukmdev Narayan Yadav) का नाम आते ही जेहन में ठेठ देसी मिजाज और अंदाज सामने आता है। हुकुमदेव नारायण यादव संसद में अपने चुटीले और ठेठ अंदाज से बड़े बड़ों को चित करने में माहिर हैं। हुकुमदेव नारायण यादव को राजनीति में अहम योगदान देने के लिए उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म भूषण नवाजा। ये सम्मान भारत रत्न, पद्म विभूषण के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में हुकुमदेव नारायण यादव को पद्म भूषण सम्मान दिया गया। इस दौरान भी वो अपने चिरपरिचित अंदाज में ही दिखे। वो आधी बंडी, गले में गमछा लपेटे महामहिम राष्ट्रपति के हाथों से सम्मान ग्रहण किया।

हुकुमदेव नारायण यादव (Hukmdev Narayan Yadav) का परिचय
हुकुमदेव नारायण यादव की पहचान संघवाद और समाजवाद को एक साथ जीने वाले नेता के तौर पर की जाती है । हुकुमदेव नारायण यादव का जन्म 17 नवम्बर 1939 को दरभंगा जिला के बिजुली गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. पिता का नाम राजगीर यादव था और वे एक स्वतंत्रता सेनानी थे. माता का नाम चंपा देवी और पत्नी सुदेश यादव हैं. इनके दो लड़के और एक लड़की है

ग्राम प्रधान से लेकर सर्वश्रेष्ठ सांसद का सफर
आजादी से पहले जन्मे हुकुमदेव नारायण यादव का सफर किसी संघर्ष से कम नहीं है। एक किसान परिवार में पैदा हुए हुकुमदेव नारायण यादव की सादगी के सामने पीएम मोदी से लेकर दूसरे बड़े नेता तक सिर झुकाते हैं। हुकुमदेव नारायण यादव ने बिहार यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। उन्होंने ये पढ़ाई दरभंगा के ही चंद्रधारी मिथिला कॉलेज से पूरी की। वे जेपी आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं।इसके बाद उनका झुकाव समाज सेवा की ओर हो गया । देश को आजादी मिलने के महज तीन साल बाद यानि साल 1950 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आए। जब पूरा देश कांग्रेसमय था। उस दौरान वो संघ से जुड़ गए। करीब 10 सालों तक वे संघ में सक्रिय भूमिका निभाई. इसके बाद वर्ष 1960 में पहली बार राजनीति में कदम रखा. वे पहली बार अपने गांव बिजुली पंचायत के ग्राम प्रधान के लिए चुने गए थे.

जेपी आंदोलन में सांसद बने
हुकुमदेव नारायण यादव 1967 में वे पहली बार विधायक चुने गए। उसके बाद 1972 में दोबारा बिहार विधानसभा पहुंचे। इस दौरान वो जेपी आंदोलन से जुड़ गए। हुकुमदेव नारायण यादव साल 1977 में पहली बार सांसद बने। वे छठी लोकसभा के सदस्य बने. साल 1980 में लोक दल की ओर से राज्यसभा सांसद बने. इसके बाद साल 1993 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए. वे किसान मोर्चा के दो बार अध्यक्ष भी रह चुके हैं और बीजेपी के बिहार के उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया है.

मंत्री और सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान
मधुबनी के सांसद हुकुमदेव नारायण 1999 में अटल बिहारी सरकार में मंत्री बने। इस दौरान वे कृषि , परिवहन मंत्रालय और जहाज रानी मंत्रालय में राज्यमंत्री रहे। मधुबनी के सांसद हुकुमदेव नारायण यादव को 1 अगस्त 2018 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान दिया गया। उन्हें ये सम्मान साल 2014-2017 के लिए दिया गया। ये सम्मान संसद के सेंट्रल हॉल में दिया गया था। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये सम्मान गरीब,गुरबा,दलित, पिछड़े का सम्मान है।

किताब और लेख भी लिखे
गांव में साधारण परिवार में जन्मे हुकुमदेव नारायण यादव ने साल 1980 में एक किताब लिखी थी जिसका नाम “गांव की कहानी” है. इनके “किसान की बात” और “संसद में गाँव” जैसे विषयों पर लेख कई पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित किए गए हैं.
हुकुमदेव नारायण यादव को पद्म भूषण सम्मान से नवाजे जाने पर उन्हें नालंदा लाइव ढेर सारी बधाई देता है

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