फागू चौहान के राज्यपाल बनने से क्यों उड़ी जेडीयू की नींद.. जानिए

फागू चौहान को जब बिहार का राज्यपाल बनाया गया तो सबको आश्चर्य हुआ. किसी ने नहीं सोचा था कि फागू चौहान को राज्यपाल बनाया जाएगा. खुद फागू चौहान को भी इसकी उम्मीद नहीं थी. एक टीवी चैनल के इंटरव्यू में फागू चौहान ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उन्हें राज्यपाल बनाया जाएगा . लेकिन पीएम मोदी तो अपने फैसलों से अक्सर सबको चौंकाते हैं. लाल जी टंडन की जगह फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद जेडीयू की नींद उड़ गई है । क्योंकि प्रधानमंत्री ने एक तीर से कई शिकार किए हैं ।

बीजेपी का मिशन 2020
फागू चौहान को राज्यपाल बनाया जाना बीजेपी का मिशन 2020 की तैयारी का नतीजा है. लालजी टंडन बीजेपी के मिशन 2020 में फिट नहीं बैठ रहे थे, लिहाजा उन्हें वहां भेजा गया जहां चुनाव चार साल बाद होना है. लालजी टंडन मात्र 11 महीने बिहार के राज्यपाल रहे. बीजेपी के मिशन बिहार में फागू चौहान सबसे ज्यादा फिट बैठ रहे थे. लिहाजा उन्हें विधायकी छोड़कर राजभवन में बिठाने का फैसला ले लिया गया.

बड़े वोट बैंक पर बीजेपी की नजर
फागू चौहान उत्तर प्रदेश के घोसी के छह बार विधायक रह चुके हैं. और बिहार की सीमा से सटे आजमगढ़ से लेकर मऊ तक के इलाके में प्रमुख ओबोसी नेता हैं. फागू चौहान उत्तर प्रदेश की चौहान जाति से आते हैं जिसे बिहार में नोनिया जाति के नाम से जाना जाता है. बिहार में ये अति पिछड़ी जाति है और इस जाति के वोटरों की संख्या भी ठीक ठाक है. नोनिया या बेलदार को निषाद यानि मल्लाह जाति की उप जाति भी माना जाता है. ये बिहार का बड़ा वोट बैंक है. यही वो फैक्टर है जो फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाने में काम आया.

क्‍या बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी भाजपा?
दरअसल, भाजपा का नेतृत्व 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का मन बना रहा है. वो जानती है कि बिहार में अति पिछड़े वोट बैंक का महत्व क्या है. ये ईवीएम से निकलने वाला वही जिन्न है जो किसी भी पार्टी को सत्ता में बिठा सकता है. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में की गई गलती को बीजेपी दोहराना नहीं चाहती. पिछड़े वोट बैंक की अनदेखी का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा था. 2020 में पार्टी ये गलती नहीं दोहराने जा रही है और फागू चौहान की नियुक्ति इसी रणनीति का एक कदम है.

जेडीयू की नींद उड़ी
पीएम मोदी के इसी रणनीति की वजह से जेडीयू की नींद उड़ गई है । क्योंकि अगर बीजेपी ने नोनिया,निषाद और बेलदार वोटरों में सेंधमारी कर ली तो उसे मिशन 2020 में फतह करने से कोई नहीं रोक पाएगा. क्योंकि एक तो मोदी लहर है और दूसरी जमीनी स्तर पर मजबूत कैडर है. हालांकि अब देखना ये होगा कि राजनीति के हर फन के माहिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैसे पीएम मोदी को पटखनी दे पाते हैं . क्योंकि वो साल 2015 में मोदी लहर में भी पटखनी देने में सफल हुए थे ।

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