Home खास खबरें 31 कंप्यूटरों से भी तेज था वशिष्ठ बाबू का दिमाग.. जानिए अनसुनी कहानियां

31 कंप्यूटरों से भी तेज था वशिष्ठ बाबू का दिमाग.. जानिए अनसुनी कहानियां

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महान गणितज्ञ वशिष्‍ठ नारायण सिंह का 74 वर्ष की आयु में पटना के पीएमसीएच में निधन हो गया। वे 40 वर्ष से मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे। उनका अंतिम संस्‍कार राजकीय सम्‍मान के साथ बिहार के भोजपुर जिला स्थित उनके पैतृक गांव में होगा।

आंइंस्टीन को दी थी चुनौती!
कहा जाता है कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने आंइस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. हालांकि, इसके साक्ष्य कहीं नहीं मिल सके हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि नासा द्वारा अपोलो की लॉन्चिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर्स कुछ समय के लिए बंद हो गए थे. कंप्यूटर ठीक होने पर वशिष्ठ नारायण और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक था. साल 1969 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. उन्होंने नासा में भी काम किया था.

वशिष्‍ठ नारायण सिंह ने कई परेशानियों का सामना किया
वशिष्‍ठ नारायण सिंह वर्ष 1974 में मानसिक बीमारी के कारण रांची स्थित कांके के मानसिक रोग अस्पताल में भर्ती किए गए थे। बाद में वह वर्ष 1989 में गढ़वारा स्टेशन से लापता हो गए। कुछ वर्षों बाद 7 फरवरी 1993 को छपरा के डोरीगंज में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर प्लेट साफ करते मिले। वशिष्‍ठ नारायण सिंह को पिछले वर्ष अक्टूबर में पीएमसीएच के आइसीयू में भर्ती कराया गया था।

पीएमसीएच में घंटों पड़ा रहा पार्थिव शरीर
वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को पीएमसीएच परिसर में बाहर ब्‍लड बैंक के पास रखवा दिया गया था। उनका पार्थिव शरीर वहां कई तक घंटों पड़ा रहा, पीएमसीएच प्रशासन लापरवाह बना रहा। पीएमसीएच प्रशासन ने उनके पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन तक मुहैया नहीं कराया। उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक आवास तक ले जाने के लिए पीएमसीएच में मौजूद दलाल 6 हजार रुपए की मांग कर रहे थे।

मीडिया की खबर के कारण जगा पीएमसीएच प्रशासन
वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर के घंटों तक पड़ा रहा। वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन की खबर मिलते ही कई मीडिया वाले वहां पहुंचे। मीडिया के द्वारा पीएमसीएच प्रबंधन की संवेदनहीनता उजागर की गई तो उसके साथ ही पटना जिला प्रशासन भी हरकत में आया। पटना के डीएम के हस्‍तक्षेप पर उनके परिवारजनों को पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए एंबुलेंस मुहैया कराई गई।

पीएमसीएच प्रशासन का लापरवाही से इनकार
पीएमसीएच प्रशासन ने पहले तो कहा कि वशिष्ठ बाबू को मृत अवस्था में पीएमसीएच लाया गया था. लेकिन जब उनके परिवारजनों ने पीएमसीएच द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र दिखाया तो अस्पताल प्रशासन ने चुप्पी साध ली। हालांकि पीएमसीएच प्रबंधन ने लापरवाही के आरोपों से साफ-साफ इनकार किया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दी श्रद्धांजलि
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वशिष्‍ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक जताते हुए उन्‍हें महान विभूति बताया। नीतीश कुमार ने कहा कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने अपने साथ ही बिहार का नाम रौशन किया है। वशिष्ठ बाबू के निधन को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने समाज की अपूरणीय क्षति बताया है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा
 वशिष्‍ठ नारायण सिंह के निधन से भोजपुर जिला स्थित बसंतपुर गांव में उनके पैतृक घर व पूरे गांव में शोक का माहौल है। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव पर राजकीय सम्‍मान के साथ किया जाएगा, इसके लिए बिहार सरकार ने विशेष पत्र जारी किया है।

वशिष्‍ठ नारायण सिंह के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी
2 अप्रैल, 1946- जन्म।
वर्ष 1958- नेतरहाट की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान।
वर्ष 1963- बिहार के हायर सेकेंड्री की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान।
वर्ष 1964- पटना विश्वविद्यालय ने नियम बदलकर उनको 1 वर्ष दी थी बीएससी आनर्स की डिग्री।
वर्ष 1965- बर्कले विश्वविद्यालय से नामांकन पत्र मिला।
वर्ष 1965- नासा से जुड़े।
वर्ष 1967- कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली।
वर्ष 1969- द पीस ऑफ स्पेस थयोरी से आइंस्टीन की थ्योरी को चैलेंज किया, इसी पर उनको पीएचडी मिली।
वर्ष 1971- भारत वापस लौटे।
वर्ष 1972- आईआईटी कानपुर में प्राध्यापक बने।
8 जुलाई, 1973- विवाह हुआ।
वर्ष 1974- मानसिक बीमारी की जांच शुरू, रांची स्थित कांके के मानसिक रोग अस्पताल में कुछ समय के लिए भर्ती हुए।
वर्ष 1989- गढ़वारा स्टेशन से लापता।
7 फरवरी, 1993- छपरा के डोरीगंज में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर प्लेट साफ करते मिले।
14 नवंबर, 2019- लंबी बीमारी के बाद पटना में मृत्यु।

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