नालंदा में नाव से आई बारात, नाव से ही दुल्हन की विदाई

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नालंदा जिला में अभी भी कई ऐसे गांव हैं जहां पक्की सड़क अब तक नहीं पहुंच पाई है। जबकि पूरे राज्य में विकास को लेकर नालंदा बदनाम है। ऐसा ही एक गांव है हरगावां पंचायत का नेवाजी बिगहा। जो जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से महज 8 किलोमीटर की दूर है। अब भी यहां के लोगो को शहर आने के लिए जान जोखिम में लगाकर सोईबा नदी को पार करना होता है। हालत ये है कि इस गांव में बारात भी नाव से आई और दुल्हन की विदाई भी नाव से हुई

क्या है पूरा मामला
दरअसल, नेवाजी बिगहा में गुरुवार को बारात आई थी। शादी के बाद नाव पर बिठाकर बारातियों को विदा किया गया। हिचकोले खाती नई नवेली दुल्हन भी नाव पर ही अपने हमसफर के साथ जिंदगी के नए सफर पर निकल पड़ी। शादी जैसे खास दिन को लेकर लोग कितने सारे अरमान रखते हैं। लेकिन गांव पहुंचते ही सारे अरमानों पर पानी फिर जाता है। जब दूल्हा-दुल्हन को नाव से पार करना पड़ता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि नदी पर पुल का निर्माण नहीं किया गया है। बारिश के मौसम में हर साल यही हाल रहता है। ग्रामीण हर छोटे बड़े काम करने के लिए नाव का ही सहारा लेते हैं।

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एक पुल का इंतजार
नवाजी बिगहा, डंबर बिगहा, हरगावां, बभन बिगहा, प्रभु बिगहा, विष्णुपुर, गुलनी, नेपुरा, प्रभु विगहा, बेरौटी, इंद्रपुर गांव के हजारों लोग इससे प्रभावित हैं। पिछले चुनाव में पुल बनाने की मांग की गई थी, जिसे लेकर वोट वहिष्कार भी हुआ था। उस वक़्त आश्वासन दिया गया, लेकिन आश्वासन फाइलों में ही सिमट कर रह गया। यह गांव राजगीर विधानसभा में आता है, जहां पिछले कई सालों से एनडीए के विधायक का कब्जा रहा है। बावजूद इसके पुल का निर्माण नहीं किया जा सका है।

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नाव ही एकमात्र सहारा
गांव वालों का कहना है कि सोइबा नदी पर पुल नहीं रहने से रोजमर्रा की परेशानियों से जूझना पड़ता है। हर दिन जिदगी से जद्दोजहद करना पड़ता है। नदी के आसपास के दर्जन भर गांव की हजारों की आबादी पुल नहीं होने से बुरी तरह प्रभावित हैं। विकास से पूरी तरह वंचित हैं। लोग नाव के सहारे जान जोखिम में डालकर जीवन जीने को मजबूर और लचार हैं। जो भी एक बार इस गांव में आते हैं तो फिर भगवान से यही दुआ करते हैं कि वह पुनः इस गांव में वापस लौट कर ना आएं। अगर किसी की बारात आती है तो विदाई से लेकर बारात आने जाने तक का काम एकमात्र सहारा नाव ही है।

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