प्रेमिका से ना मिल पाने की तड़प, फांसी लगाकर जान दी, सुसाइड नोट में लिखा….

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कहा जाता है कि प्यार जो ना कराए। प्रेमिका को पाने की तड़प कुछ ऐसी होती है कि प्रेमी कभी तुलसीदास तरह सांप को भी रस्सी समझ बैठता है । तो कभी देवदास बनकर पारो का इंतजार करता है। लेकिन कई ऐसे प्रेमी होते हैं जो जिंदगी को ही खत्म कर लेते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है । जब प्रेमिका को उसके घरवाले लेकर चले गए तो प्रेमी ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

क्या है पूरा मामला
दोनों के बीच प्यार बंगाल में हुआ और पटना आकर जान दिया। कहानी कुछ अजीब है। मामला राजधानी पटना के सिपारा पुल की है। जहां एक प्रेमी ने फांस लगाकर जान दे दिया। मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने अपनी प्रेम-कहानी के दुखद अंत को बयां किया है। मृतक की पहचान छपरा के रहने वाले 22 साल के अजय ठाकुर के रूप में हुई है ।

क्या है प्रेम कहानी
दरअसल, अजय ठाकुर पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में रहता था। वहीं एक लड़की से उसे प्यार हो गया। वो किसी भी हालत में अपनी प्रेमिका को पाना चाहता था। लेकिन लड़की के घरवालों ने उसकी शादी कहीं और करा दी। लेकिन तब भी दोनों अक्सर मिलते थे। एक दूसरे के साथ जीना चाहते थे।

प्रेमिका को बेटा हो गया
इस बीच अजय ठाकुर की प्रेमिका एक बच्चे की मां बन गई। लेकिन तब भी अजय अपनी प्रेमिका को छोड़ना नहीं चाहता था। मौका मिलने पर दोनों एक दूसरे मिलते थे। एक दिन दोनों ने भागकर नए सिरे से जीवन की शुरुआत करने की ठानी। फिर क्या था दोनों घर से भाग आए

प्रेमिका के घरवालों ने पकड़ लिया
शुक्रवार को अजय ठाकुर अपनी प्रेमिका और उसके बच्चे को लेकर सिलिगुड़ी से पटना आ गया । पटना के मीठापुर बस स्टैंड के पास तीनों एक होटल में रुके थे। इस बीच लड़की के परिवार दोनों को खोजते हुए पटना पहुंचे। दोनों को ढूढने के बाद पहले अजय की पिटाई की फिर लड़की और उसके बच्चे को लेकर वापस सिलिगुड़ी लौट गए।

निराश होकर खुदकुशी की
प्रेमिका के लौट जाने के बाद अजय पटना के होटल में अकेला रह गया। जिसके बाद परेशान अजय ठाकुर ने गले में रस्सी लगाकर सिपारा पुल के पास आत्महत्या कर लिया। खुदकुशी से पहले अजय ठाकुर ने एक सुसाइड नोट भी लिख रखा था। जिसमें उसने पूरी बात का जिक्र किया है।

छपरा का रहने वाला था
अजय ठाकुर छपरा के मसरख के नगुनी गांव का रहने वाला था। उसके पिता शंकर ठाकुर गांव में ही हजामत बनाने का काम करते हैं। चार भाइयों में अजय तीसरे नंबर पर था। तीन भाई छपरा में रहकर सैलून चलाता है। जबकि अजय अपने बहनोई के साथ सिलिगुड़ी में मेंस पार्लर में काम करता था

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