अशोक चौधरी की बढ़ी मुश्किलें, जा सकती है मंत्री की कुर्सी.. जानिए क्यों ?

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बिहार सरकार के मंत्री और नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेता अशोक चौधरी की मुश्किलें बढ़ सकती है। क्योंकि अशोक चौधरी की कुर्सी जाने का ख़तरा मंडराने लगा है। अशोक चौधरी को बिहार सरकार में भवन निर्माण मंत्री बनाए जाने के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है । जिसे सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की बेंच ने स्वीकार कर लिया है ।

किसने दी है चुनौती
बिहार के भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी को मंत्री बनाए जाने को संतोष कुमार ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है । याचिकाकर्ता के वकील दीनू कुमार ने अशोक चौधरी को मंत्री बनाए जाने को असंवैधानिक बताया है । जिसे सुनवाई को पटना हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है । इस पर 19 जुलाई को सुनवाई होगी।

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अशोक चौधरी के खिलाफ याचिका क्यों
दरअसल, याचिकाकर्ता का कहना है कि अशोक चौधरी का MLC यानि विधान पार्षद का टर्म समाप्त हो गया था। इसके बावजूद वे 6 मई 2020 से 5 नवंबर 2020 तक मंत्री पद पर बने रहे। उसके बाद वे न तो विधानसभा और ना ही विधान परिषद के सदस्य बने । लेकिन बिहार सरकार ने दोबारा इन्हें 16 नवंबर 2020 को मंत्री पद का शपथ ग्रहण करा दिया। इसके बाद 17 मार्च 2021 को राज्यपाल ने अशोक चौधरी को विधान पार्षद के रूप में मनोनीत किया।

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संविधान का हवाला दिया
याचिकाकर्ता का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 (1) तथा 164 (4) के मुताबिक मंत्री पद पर बने रहने के लिए किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है। किसी भी सदन के सदस्य नहीं होने के बावजूद किसी को मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन मंत्री को छह महीने के अंदर किसी सदन का चुनाव जीत सदस्य बनना अनिवार्य है। भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी किसी सदन का चुनाव लड़े ही नहीं। उन्हें मनोनीत किया गया है, ऐसे में वे पद पर बने रहने के लायक नहीं हैं।

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19 जुलाई को सुनवाई
पटना हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है । अब इसपर 19 जुलाई को अगली सुनवाई होगी। अगर हाईकोर्ट को लगता है कि याचिकाकर्ता की दलील सही है तो ऐसे में अशोक चौधरी की मुश्किलें बढ़ सकती है । साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दामन पर भी दाग लग सकता है ।

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