नालंदा DM ऑफिस में तैनात 63 कर्मचारियों का 22 साल का इंतजार खत्म.. आखिरकार मिल गया प्रमोशन.. जानिए किसे क्या बनाया गया

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नालंदा के डीएम ऑफिस में तैनात 63 कर्मचारियों का 22 साल का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। साल 2023 जाते जाते 63 कर्मचारियों की चेहरे पर मुस्कान और खुशी दे गई । आखिरकार समाहरणालय लिपिक संवर्ग के 63 कर्मचारियों को प्रमोशन मिल गया है ।

जिन 63 कर्मचारियों को प्रमोशन दिया गया है । उसमें 15 कर्मचारी को सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और 31 प्रधान सहायक और 17 को उच्च श्रेणी के पद पर प्रमोट किया गया है । आपको बता दें कि इससे पहले समाहरणालय सेवा के 283 कर्मचारियों को वरीयता सूची और मापदंडों के आधार पर लिपिकों को उच्चतर पद पर प्रोन्नति दी गयी थी। जिन सभी कर्मचारियों को प्रमोशन मिला है। उनका अब जल्द ही दूसरे विभाग में ट्रांसफर भी किया जाएगा ।

कौन कौन बने सहायक प्रशाखा पदाधिकारी
जिन लोगों को सहायक प्रशाखा पदाधिकारी बनाया गया है । उसमें नाहिद सबिहा,उमेश प्रसाद.गोपाल शरण,संजयनाथ दत्त कुलियार,महेश चौधरी शामिल हैं । इनके अलावा नीलम चौधरी,अरुण चौधरी,धनंजय कुमार,सत्येंद्र प्रसाद,रवींद्र कुमार,राजशेखर कुमार,राकेश कुमार, उमाकांत,अनिल कुमार और प्रभाकर कुमार को भी अब सहायक प्रशाखा पदाधिकारी बनाया गया है।

प्रधान सहायक कौन कौन बने
जिन लोगों को सहायक से प्रधान सहायक बनाया गया है । उसमें शौकत करीम,संतोष कुमार,जयवर्धन,पुष्प राज,रंजीत कुमार,अखिलेश कुमार,अरविंद कुमार, कुंदन कुमार सिन्हा,राधिका रमन,विकास कुमार,राजेश रंजन,दीनानाथ पासवान,प्रफुल्ल चंद्र सिंह,गोपाल प्रसाद,वृंद कुमार,उदय कुमार,विजय कुमार,राजू कुमार,मनोज कुमार,श्रवण पासवान,जितेंद्र कुमार,नृपेंद्र कुमार,ओम प्रकाश,अवधेश कुमार,फानिंद कुमार,अरुण कुमार तरुण,प्रकाशचंद रजक,संजय कुमार नीरज और राहुल कुमार को सहायक से प्रधान सहयाक बनाया गया है ।

उच्च श्रेणी लिपिक में प्रमोशन
दिनेश पासवान,रविशंकर कुमार,ज्योति सिंह,अभिनव कुमार सिन्हा,विद्या कुमारी,विकास कुमार,संजीव कुमार.प्रवीण कुमार,प्रमोद कुमार,अरस्तु कुमार,रंजीत कुमार,आनंद कुमार,राणा प्रदीप कुमार,मोअज्जम अली,खूशबू कुमारी को निम्न से उच्च श्रेणी लिपिक बनाया गया है ।

आपको बता दें कि इसमें से कई ऐसे कर्मचारी भी है जो अगले साल यानि 2024 के शुरुआत में रिटायर भी हो जाएंगे। लेकिन इस प्रमोशन से उनकी बांछें खिल गई है। इससे पहले नालंदा समरहणालय में 22 साल पहले 2001 में प्रमोशन हुआ था। उसके बाद यहां प्रमोशन नहीं हुआ था। जिसकी मांग को लेकर कर्मचारियों को लंबी जंग लड़नी पड़ी ।

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