सबसे शातिर सॉल्वर गैंग का खुलासा, जानकर होश उड़ जाएंगे

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एक अदद सी सरकारी नौकरी पाने के लिए युवा जी जान लगा देते हैं। अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं। ज्यादातर ऐसे होते हैं जो अपनी पूरी जवानी ही नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगा देते हैं । समाज और परिवार का ताना सहते हैं। लेकिन उनका सपना तक चकनाचूर हो जाता है जब गलत तरीके से या पैसे के बल पर उनकी नौकरी छीन ली जाती है।

प्रिटिंग प्रेस तक जुड़े थे तार
सॉल्वर गैंग पैसे लेकर दूसरे के बदले परीक्षा में बैठते हैं और नालायकों को नौकरी दिला देते हैं । ऐसा ही एक सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ हुआ है। जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से सेटिंग कर फर्जी तरीके से सरकारी और निजी नौकरी दिलाता था। सॉल्वर गैंग का कनेक्शन नालंदा से जुड़ा है ।

चार लोग गिरफ्तार
पटना पुलिस (Patna Police) ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है । जिसका सरगना नालंदा का रहने वाला है।इनके पास से 70 अभ्यर्थियों के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स भी बरामद किये गये हैं.

40 लाख रुपए तक लेते थे
ये गैंग बिहार और दूसरे राज्यों में होने वाली ऑनलाइन परीक्षाओं में भी धांधली करते थे। गिरोह में व्यापम घोटाले और यूपी में टीईटी परीक्षा में हुई धांधली में जेल गया एक आरोपी भी शामिल है। दोनों फिलहाल पुलिस गिरफ्त से फरार हैं। पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि रेलवे, एसएससी, एमभीआई, टीसीएस, एनटीपीसी, आरआरबी और दूसरे परीक्षाओं में स्कॉलर बैठाकर और तकनीक के सहारे ये लोग फर्जीवाड़े का खेल खेलते थे। परीक्षा देने वाले कैंडिडेट से 30 से 40 लाख रुपये वसूलते थे।

कितना एडवांस में लेते थे
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अभ्यर्थियों से एडवांस के तौर पर डेढ़ से दो लाख रुपये लेते थे। इनके पास से नकद 18 लाख 78 हजार नकद रुपये, हिडेन कैमरा, हार्ड डिस्क, लैपटॉप, 70 अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्र, रेलवे, एनटीपीसी-आरआरबी के एडमिट कार्ड और अन्य कागजात बरामद किये गये हैं।

कौन-कौन गिरफ्तार
गिरोह के कुल चार सदस्य अश्विनी सौरभ (तेलहाड़ा, नालंदा), तनेश कुमार (मनेर, रतन टोला), रूपेश कुमार (सुभाषनगर, रामकृष्णानगर) और शिवशंकर कुमार (विक्रम, पटना) पुलिस की गिरफ्त में हैं।

अश्विनी है मास्टरमाइंड
गिरोह का सरगना अश्वनी सौरभ है जो नालंदा के तेल्हाड़ा का रहने वाला है और पटना के बुद्धा डेंटल के पास गांधी नगर में रहता था। इसने 70 लाख रुपए इन्वेस्ट कर मुजफ्फरपुर के रामदयालु चौक के पास खुद का ऑनलाइन सेंटर खोल रखा है. इस गैंग ने गया और पटना में भी तीन ऑनलाइन सेंटर में पैसे लगाए थे. अश्वनी सौरव के मुजफ्फरपुर स्थित ऑनलाइन परीक्षा केंद्र से 270 अभ्यर्थी परीक्षा देते थे. सेंटर के लिए सौरव ने सिटी हेड को पैसा देकर मैनेज भी कर लिया था जो सेंटर को सर्टिफाइड और वेरीफाइड कर देता था.

प्रिंटिंग प्रेस से कनेक्शन
खास बात ये है कि इस गैंग के कनेक्शन उस प्रेस से भी हैं जहां प्रश्नपत्र छपते थे। कोलकाता स्थित कौशिक प्रेस के मालिक को वाराणसी पुलिस वहां हुई टीईटी की परीक्षा में धांधली के मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। इसी प्रेस से इस गैंग के सदस्य भी अलग-अलग परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक करवा लिया करते थे।

सैनिटाइजर के डिब्बे में कैमरे से धांधली
सॉफ्टवेयर के माध्यम से गिरोह के लोग ऑनलाइन परीक्षा सेंटरों से लाइव आईपी एड्रेस जेनरेट कर सामानांतर रूप से अपने लैपटॉप पर प्रश्नों को देखकर हल कर दिया करते थे। ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों पर कर्मियों को मिलाकर सेनेटाइजर के डिब्बे में बटन कैमरा लगाकर प्रश्नों की तस्वीर खींचकर उसे बाहर भेजा जाता था। ऑनलाइन परीक्षा लेने वाली कंपनियों में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरोह में हैं।

अतुल वत्स गैंग से भी कनेक्शन
इस गिरोह का कनेक्शन अतुल वत्स के गैंग से भी है। अतुल सीधे तौर पर फिलहाल काम नहीं कर रहा। हाल ही में एसके पुरी थाने की पुलिस ने उसके गैंग के एक पूर्व सदस्य अंशु सिंह के घर छापेमारी की थी। अंशु का भाई पकड़ा गया था जबकि वह फरार हो गया था।

एनी डेस्क एप का इस्तेमाल
एसएसपी के मुताबिक एनी डेस्क एप का इस्तेमाल कर शैक्षणिक संस्थानों से अभ्यर्थी का आईडी पासवर्ड लेकर उसे सॉल्वर से हल करवाया जाता है। परीक्षाओं में असली अभ्यर्थी की जगह स्कॉलर को बैठाते हैं। मैग्नेटिक ईयरपीस का इस्तेमाल कर प्रश्नों का हल करवाते हैं।

कैसे हुई गिरफ्तारी
दरअसल पटना पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर दानापुर में एक गिरोह काम कर रहा है. इसी सूचना के बाद पटना एसएसपी ने दानापुर एएसपी के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया. इस पुलिस टीम ने दानापुर के आरके पुरम कॉलोनी स्थित एक नवनिर्मित किराए के मकान में छापेमारी की. इस दौरान कमरे से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया.

क्या क्या मिला
गिरोह के पास से 19 लाख रुपए नगद के अलावा 19 हार्ड डिस्क, 774 सीपीयू मदरबोर्ड, 5 वाईफाई राउटर, 21 मॉनिटर, 3 रन एक आईपैड, एक पैन ड्राइव, 12 मोबाइल, 10 रबर मोहर एक् हिडेन कैमरा, 10 कनेक्टर, 6 ब्लूटूथ डिवाइस, 6 ईयर पीस, एक टूलकिट, एक्सटेंशन बोर्ड और एक यूएसबी हब भी जब्त किया है.

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