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नालंदा लोकसभा सीट का इतिहास जानिए.. कब हुआ गठन और कुर्मिस्तान बनने की कहानी

नालंदा की पहचान उसकी ऐतिहासिकता और पौराणिकता है. दुनिया भर में लोग इसे ज्ञान की घरती के तौर पर जानते हैं. विश्व की सबसे प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष आज भी यहां मौज़ूद हैं. जहां दूसरे देशों से छात्र पढ़ने आते थे. नालंदा को भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की धरती के तौर पर भी जाना जाता है. भारत पर राज करने वाले मगध साम्राज्य की राजधानी भी कभी नालंदा की राजगृह होती थी. मौजूदा वक्त में नालंदा की पहचान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला के तौर पर होती है.

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नालंदा का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. लेकिन आज हम बात कर रहे हैं नालंदा लोकसभा सीट की. तो सवाल ये उठता है कि क्या नालंदा लोकसभा सीट का गठन आजादी के समय ही हुआ था ? नालंदा लोकसभा सीट कब बना? पहली बार सांसद कौन बने? नालंदा कैसे कुर्मिस्तान बना ? इन्ही सवालों के जवाब आपको देने की कोशिश करेंगे.

पटना सेंट्रल ही नालंदा लोकसभा सीट था
आजादी के बाद देश में पहला लोकसभा चुनाव साल 1952 में हुआ था। उस वक्त नालंदा संसदीय सीट का अस्तित्व नहीं था। तब पटना संसदीय क्षेत्र हुआ करता था। जिसमें चार सीटें थी पटना ईस्ट, पाटलिपुत्रा, पटना सेन्ट्रल और पटना शाहाबाद। उस समय का पटना सेन्ट्रल ही वर्तमान का नालंदा लोकसभा क्षेत्र है। जहां से कांग्रेस के कैलाशपति सिन्हा ने पहला चुनाव जीता और सांसद बने

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कब बना नालंदा लोकसभा सीट
साल 1957 में आजादी के बाद देश में दूसरा आम चुनाव हुआ। इस आम चुनाव के दौरान ही नालंदा संसदीय सीट अस्तित्व में आया। नालंदा लोकसभा सीट पर कांग्रेस के कैलाशपति सिन्हा चुनाव लड़े और वो विजयी हुए. इसके बाद 1962 में आम चुनाव हुआ तो कांग्रेस के सिद्धेश्वर प्रसाद चुनाव जीते । इसके बाद सिद्धेश्वर प्रसाद 1971 तक लगातार तीन बार नालंदा के सांसद रहे

1972 में नालंदा जिला बना
नालंदा लोकसभा सीट का अस्तित्व तो साल 1957 में ही आ गया था। लेकिन नालंदा जिला का गठन साल 1972 में हुआ। पटना जिला से अलग होकर नालंदा जिला बनाया गया

साल 1977 में उखड़ा कांग्रेस का पैर
नालंदा लोकसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा था। आजादी के बाद से साल 1977 तक लगातार कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हो रही थी। तभी साल 1977 में जेपी आंदोलन हुआ और नालंदा से कांग्रेस का पैर ऐसा उखड़ा की फिर जम नहीं पाया। साल 1977 में भारतीय लोकदल के विरेन्द्र प्रसाद ने कांग्रेस की जीत का सिलसिला तोड़ा और विरेंद्र प्रसाद नालंदा से सांसद बने

फिर सीपीआई ने कब्जा जमाया
जेपी आंदोलन में नालंदा संसदीय सीट पर भारतीय लोकदल ने कब्जा तो जमाया लेकिन वो टिक नहीं पाया. तीन साल बाद ही देश में मध्यावधि चुनाव हुए. साल 1980 में हुए चुनाव में सीपीआई के विजय कुमार यादव ने जीते। इसके बाद 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में जब कांग्रेस की लहर थी ।तब भी नालंदा सीट पर सीपीआई का ही कब्जा बरकरार रहा। साल 1989 में जब देश में बोफोर्स घोटाले के खिलाफ वीपी सिंह की लहर थी तो नालंदा लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया और रामस्वरुप प्रसाद सांसद बने। लेकिन साल 1991 में देश में एक बार फिर मध्यावधि चुनाव हुए। जिसमें सीपीआई के विजय कुमार यादव ने वापसी की और सांसद चुने गए।

नीतीश कुमार ने तोड़ा तिलिस्म
साल 1996 में नीतीश कुमार ने नालंदा में सीपीआई की तिलिस्म को नेस्तानाबूद कर दिया. नीतीश कुमार ने देश के बड़े मजदूर नेता जॉर्ज फर्नांडिस को नालंदा से चुनाव लड़वाया. जॉर्ज साहब भारी मतों से चुनाव जीते और नालंदा से जीत की हैट्रिक लगाई. जॉर्ज फर्नांडिस तीन बार नालंदा से सांसद बने. इसके बाद साल 2004 में खुद नीतीश कुमार नालंदा से चुनाव लड़े और भारी मतों से जीते.

2009 में नालंदा का परिसीमन हुआ
साल 2004 में नीतीश कुमार बाढ़ और नालंदा दोनों सीट से चुनाव लड़े थे. बाढ़ लोकसभा सीट पर उनके खिलाफ ऐसी गोलबंदी हुई की नीतीश कुमार को बाढ़ लोकसभा सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा. पांच साल बाद साल 2009 लोकसभा चुनाव से पहले सीटों का परिसीमन हुआ. जिसमें बाढ़ लोकसभा सीट के अस्तित्व को ही खत्म कर दिया गया और नालंदा लोकसभा सीट का नया रूप सामने आया

जब नालंदा बना कुर्मिस्तान
नालंदा जिला का दो विधानसभा क्षेत्र चंडी और हरनौत बाढ़ संसदीय क्षेत्र में शामिल था. लेकिन 2009 के परिसीमन में चंडी विधानसभा क्षेत्र को खत्म कर दिया गया. वहीं, हरनौत विधानसभा क्षेत्र को नालंदा में शामिल कर दिया गया। अब नालंदा लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की संख्या 6 से बढ़कर 7 हो गई. साथ ही नालंदा जिला का एक अपना संसदीय क्षेत्र हो गया और पूरी कुर्मी आबादी एक संसदीय क्षेत्र में शामिल हो गया. जिससे नालंदा में सबसे ज्यादा वोटरों की संख्या कुर्मी की हो गई . और ये नीतीश कुमार का सुरक्षित दु्र्ग कहा जाने लगा. यहां के मतदाता सीधे मुख्यमंत्री को देखते हैं, प्रत्याशी को नहीं। तीन दशक का इतिहास बता रहा है कि जदयू की ओर से मैदान में जो भी होगा, नालंदा के लोगों की पहली पसंद होगा

नालंदा संसदीय क्षेत्र में कौन-कौन विधानसभा क्षेत्र
नए परिसीमन में नालंदा जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसमें अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा,नालंदा और हरनौत विधानसभा क्षेत्र शामिल है. हरनौत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विधानसभा क्षेत्र रहा है।

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