Home हमारे हीरो अमेरिका में बिहारी ने बनाया दुनिया का सबसे सस्ता पोर्टेबल वेंटिलेटर.. जानिए कौन हैं वो

अमेरिका में बिहारी ने बनाया दुनिया का सबसे सस्ता पोर्टेबल वेंटिलेटर.. जानिए कौन हैं वो

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सच कहा गया है.. एक बिहारी सब पर भारी.. जी हां, जब सारी दुनिया कोरोना से बचने के लिए वेंटिलेटर बनाने में जुटी है. ऐसे में एक बिहारी ने वो कारनामा कर दिखाया है जिसकी चर्चा आज दुनिया भर में हो रही है. और हो भी क्यों ना.. क्योंकि अमेरिका में एक बिहारी ने दुनिया का सबसे सस्ता पोर्टेबल वेंटिलेटर बनाया है.

प्रोफेसर देवेश रंजन ने बनाया सबसे सस्ता वेंटीलेटर
प्रोफेसर देवेश रंजन फिलहाल अमेरिका के जॉर्जिया में रहते हैं. देवेश रंजन जॉर्ज डब्ल्यू वुड्रफ स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं. वे मूलत: बिहार के नालंदा जिला के रहने वाले हैं. उन्होंने दुनिया का सबसे सस्ता पोर्टेबल वेंटिलेटर बनाया है. जिसकी कीमत महज साढ़े सात हजार रुपए हैं.

प्रोफेसर देवेश रंजन के बारे में जानिए
प्रोफेसर देवेश रंजन का जन्म बिहार के नालंदा जिला की बेन प्रखंड की बड़की आट गांव में हुआ. इनके पिता रमेश चंद्र सिंचाई विभाग के अधिकारी रहे हैं. देवेश रंजन ने 10वीं तक की पढ़ाई पटना के ज्ञान निकेतन से की. इसके बाद पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. फिर तमिलनाडु के त्रिची के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक की डिग्री ली. इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मेडिसन से मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री ली.

डॉक्टर पत्नी का मिला साथ
देवेश की पत्नी कुमुदा का जन्म रांची में हुआ. जब कुमुदा छठी क्लास में थी तब माता-पिता के साथ रांची से अमेरिका चली गई थी. न्यूजर्सी में उन्होंने मेडिकल ट्रेनिंग ली. देवेश के इस अविष्कार में एक चिकित्सक महत्वपूर्ण भूमिका थी जो डॉ. कुमुदा ने निभाया. डॉ कुमुदा बताती है कि हमारे इस काम का एक ही मकसद है कि कम कीमत में वेंटिलेटर बनाना, जिसका पूरी तरह से नियंत्रण डॉक्टर के हाथ में रहे. इस समय दुनिया में वेंटिलेटर की कमी है. दुनिया में लाखों लोग कोरोना की वजह से मर चुके है और लाखों संक्रमित हैं ऐसे में ये उपकरण बहुत जरूरी था.

कोरोना के लिए ही बनाया गया है वेंटिलेटर
यह एक ओपन एयरवेंट जीटी वेंटिलेटर है. यह वेंटीलेटर एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम (Acute Respiratory Distress Syndrome) के इलाज के लिए बनाया गया है. कोरोना वायरस के संक्रमण में मरीजों में यही सिंड्रोम बड़ी समस्या बनकर सामने आया है. इसके चलते फेफड़े सख्त हो जाते हैं और सांस लेने में दिक्कत होती है. इस वजह से मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है.

प्रोफेसर देवेश रंजन का क्या है कहना
प्रोफेसर देवेश रंजन का कहना है कि कम कीमत के वेंटिलेटर का आविष्कार हम लोगों ने इस वजह से किया कि भारत जैसे विकासशील देश बड़ी संख्या में महंगा वेंटिलेटर अफोर्ड नहीं कर सकते हैं. ऐसे में भारत के लिए लो कॉस्ट वेंटिलेटर बनाने की जरूरत है और भी जो देश महंगा वेंटिलेटर अफोर्ड नहीं कर सकते हैं उनके लिए यह वरदान साबित होगा.प्रो. देवेश रंजन ने बताया कि उनका बनाया वेंटिलेटर, आईसीयू वेंटिलेटर नहीं है. यह एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के इलाज के लिए बनाया गया है.

बड़ी संख्या में बनने की वजह से ये सस्ता होगा
देवेश बताते है कि अगर इसे अधिक संख्या में बनाया जाए तो इसकी लागत 100 डॉलर यानी करीब साढ़े सात हजार रुपए आएगी. अभी फिलहाल डेढ़ से दो लाख का एक वेंटिलेटर आता है . देवेश ने अपनी टीम के साथ प्रोटोटाइप वेंटिलेटर को महज तीन हफ्ते में तैयार कर लिया. उन्होंने बताया कि इस वेंटिलेटर का प्रोडक्शन जल्द शुरू होने वाला है. यह भारत में भी मिलने लगेगा.

जल्द उपलब्ध होगा सस्ता वेंटिलेटर
देवेश बताते है कि प्रोटोटाइप से वेंटिलेटर बनाने का काम शुरू हो चुका है. इसे सिंगापुर का रिन्यू ग्रुप बना रहा है, उनके मुताबिक जल्द ही काफी संख्या में यह वेंटिलेटर बनकर तैयार हो जाएगा. भारत सहित कई देशों में इसकी बिक्री भी शुरू हो जाएगी. यह इतना पोर्टेबल होगा कि लोग इसे बहुत ही आसानी से अपने घर में रख सकते हैं.

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